टूट गयी भाषा और देशों की दीवारें,सांई मां संग सैकड़ों विदेशी श्रद्धालुओं ने लगायी डुबकी
प्रयागराज। वसुधैव कुटुम्बकम के सूत्र वाक्य को अंगीकार करते हुए जगद्गुरु सांई मां ने अपने सैकड़ों विदेशी भक्तों के साथ वसंत पंचमी पर संगम में डुबकी लगायी। पारंपरिक भारतीय लिबास और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विभिन्न देशों से आए डेढ़ सौ अधिक श्रद्धालुओं ने जब गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगायी तो सनातन धर्म के प्रति उनकी आस्था देखते बन रही थी। भाषा और देशों की दीवारें टूट गयीं। सनातन धर्म का आकर्षण और गंगा मइया के प्रति आस्था का रंग सात समंदर पार से आए विदेशी भक्तों पर ऐसा चढ़ा कि वो खुद को पुण्य की डुबकी लगाने से नहीं रोक सके।

सांई मां के विदेशी भक्तों ने न केवल वैदिक मंत्र का उच्चार किया बल्कि भजन व प्रार्थना में भी शामिल हुए। रविवार को कुंभनगरी के सेक्टर 14 स्थित शक्तिधाम शिविर में मौजूद अमेरिका, बेल्जियम, इजराइल, जापान, फ्रांस, कनाडा, आयरलैंड आदि देशों से आए सैकड़ों विदेशी भक्तों ने संगम में पुण्य की डुबकी लगायी।
जगद्गुरु सांई मां ने कहा कि कहा, गुरु का मतलब है जीवन के अंधकार को दूर करने वाला। उन्होंने दया और प्रेम का संदेश दिया। कहा, भौतिकता और आधुनिकता के इस दौर में हमें सामंजस्य बिठाने की जरूरत है। मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। इसकी सीख कुंभ में आकर दुनिया का हर इंसान ले सकता है।
विदेशी महामंडलेश्वर रहे आकर्षण का केन्द्र

प्रयागराज। वसंत पंचमी पर अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी आखाड़ा के साथ पहुंचे शक्तिधाम के नवनियुक्त 9 विदेशी महामंडलेश्वर शाही स्नान के खास आकर्षण रहे। पहली बार महामंडलेश्वर के तौर पर शाही स्नान में पहुंचना स्वामी परमेश्वरानंद, श्री देवी ब्रह्मïचारी, राजेश्वरी दासी ब्रह्मïचारी, ललिता श्री दासी ब्रह्मïचारी, दयानन्द ब्रह्मïचारी, त्यागानन्द दास ब्रह्मïचारी, अनन्तानन्द दास ब्रह्मïचारी, जयेन्द्र दास ब्रह्मïचारी, जीवानन्द दास ब्रह्मïचारी के लिए खास मायने रखता था। इन्होंने संत सामाज का आभार जताया। एक स्वर में कहा कि संगम स्नान के बाद वो खुद में नई ऊर्जा महसूस कर रहे हैं। यहां आकर हमें नयी रोशनी मिली जिसे हम ताउम्र हम महसूस करेंगे। भारत की महान संत परंपरा का अंग बनना सौभाग्य की बात है। आने वाले समय में और विदेशियों को सनातन धर्म से जोडऩे का प्रयास करेंगे।


