भागवत निष्क्रिय ज्ञान नहीं कर्मशीलों का श्रंगार है: अनिरुद्ध जी महाराज
प्रयागराज। आज 18 दिसम्बर को दिव्य अध्यात्म राष्ट्र सेवा मिशन प्रयागराज के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर मुंशी राम प्रसाद की बगिया नारायण वाटिका में उपस्थित भक्तजनों को कथा का रसास्वादन कराते हुए डॉ अनिरुद्ध जी महाराज ने कहा कि ऊधो जी भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं कि जब अंतर्ध्यान आप हो जाएंगे तब भक्तों का कल्याण कैसे होगा? तब भगवान श्री कृष्ण कहते हैं अंतर्ध्यान होने के बाद मैं छीर सागर में ना जाकर श्रीमद्भागवत रूपी समुद्र में निवास कर लूंगा और श्रीमद्भागवत इस लोक में रहेगा और इससे लोगों का कल्याण होगा।


श्रीमद्भागवत के रहस्य में तत्व भी छिपा है वह यह है कि सुकदेव जी महाराज ने देवताओं को भागवत का अमृत नहीं दिया बल्कि परीक्षित को रसपान कराया ऐसा क्यों
क्योंकि देव योनि कर्म योनि नहीं है और श्रीमद्भागवत कर्म योगियों के लिए है इसका अर्थ है भागवत निष्क्रिय ज्ञान नहीं कर्मशीलो का श्रृंगार है ।

यही भागवत की लोकापीयूयुक्ता है आज की कथा के मुख्य यजमान श्री रतन अग्रवाल रहे और संचालन राजेश केसरवानी ने किया कथा के मुख्य अतिथि सांसद रीता बहुगुणा जोशी, श्री उत्तम दास( भारतीय सैनिक) डॉक्टर कृतिका अग्रवाल इंजीनियर उदय प्रताप सिंह श्री आशीष राष्ट्रीय संघ सेवक संघ के नगर कार्यवाह श्री सतीश चंद्र श्री शिव कुमार, डॉ रमा सिंह ने महाआरती की इस अवसर पर श्री कुमार नारायण, श्री नीरज गुप्ता राजेश केसरवानी, प्रमिल केसरवानी, प्रबोध, मानस परितोष मिश्रा, अरुण जयसवाल, सचिन जयसवाल, रामलाल दिवाकर, निखिल, राजेंद्र कुमार कुसुम केसरवानी, उषा केसरवानी, संतोष चौरसिया, विमला जायसवाल, मंजू केसरी, प्रीति गुप्ता, मधुसूदन, अशोक सिंह आदि सैकड़ों भक्तों ने कथा का श्रवण किया।




