कुंभ मीमांसा में कुंभ-2019 का सराहनीय उल्लेख

असिस्टेंट प्रोफेसर डा वंदना द्विवेदी ने संस्कृत में लिखा
सीएम सहित अन्य प्रमुख लोगों ने किया था पुस्तक का विमोचन
(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । नवयुग डिग्री कालेज लखनऊ की असिस्टेंट प्रोफेसर डा वंदना द्विवेदी ने कुंभ मेला -2019 तीर्थ राज प्रयाग का अपनी संस्कृत की पुस्तक कुंभ मीमांसा में सराहनीय उल्लेख किया है। सबसे बडी बात यह है कि कुंभ मीमांसा संस्कृत अर्थात देवभाषा में लिखी गयी है। संस्कृत की इस पुस्तक में कुंभ मेला की तैयारियों से लेकर उसकी शानदार सफलता सहित सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ वंदना द्विवेदी ने बताया कि देवभाषा संस्कृत में पूर्ण रूप से निबद्ध कुंभ मीमांसा पुस्तक में 175 पृष्ठ हैं । इस पुस्तक का प्रकाशन आयुष्मान पब्लिकेशन हाउस नई दिल्ली नं किया है। इस पुस्तक का विमोचन कुंभ मेले के दौरान जनवरी 2019 में प्रयाग कुंभ मेला में जगदगुरू स्वामी हंस देवाचार्य के आश्रम मे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। विमोचन समारोह में न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय सहित अन्य प्रमुख लोग एवं संत- महात्मा शामिल हुए थे।
असिस्टेंट प्रोफेसर डा वंदना द्विवेदी ने बताया कि इस पुस्तक का शुभारंभ सर्वप्रथम मंगलाचरण से हुआ है। उसके बाद गंगा के मानस स्नान का वर्णन और नारायण तत्व साधना का भी वर्णन किया गया है। पुस्तक में सर्वप्रथम संदेश के रूप में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष महामहोपाध्याय पद्मश्री विभूषित आचार्य हरिहर कृपालु त्रिपाठी ने भी अपना अनुशंसा प्रदान किया है । पुस्तक में दिव्य भारत भूमि के माहात्म्य का भी वर्णन हुआ है जिसमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि भारत भूमि पर जन्म लेने के लिए देवता भी बहुत लालायित रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रयाग की ऐतिहासिकता और साहित्यिक परिचय को दिखाने के साथ साथ ही प्रयाग के दर्शनीय स्थलों जैसे श्याम वट, अक्षय वट , बेनी माधव आदि दार्शनिक स्थलों का भी वर्णन प्राचीन वैदिक साहित्यों केआधार पर किया गया हैं। गंगा -यमुना -सरस्वती का महत्व प्रतिपादित किया गया है। त्रिवेणी के महत्व का वर्णन करते हुए गंगा- यमुना -सरस्वती के महत्व के साथ स्नान के महत्व पर प्रकाश डाला गया है । इनके पूजन विधि का भी महत्व बताया गया है। इस पुस्तक में मुख्य रूप से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि यह केवल किसी एक जाति ,धर्म और संप्रदाय विशेष के लिए कुंभ ना होकर धार्मिक सहिष्णुता और मानवता का प्रतीक है । यह सभी जाति -धर्म- संप्रदायों के लिए आयोजित होता है। गंगा जमुनी तहजीब का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है । कुंभ शब्द की व्युत्पत्ति इस इसका तात्विक अर्थ कुंभ से तात्पर्य का भी वर्णन किया गया है। कुंभ के चारों प्रकारों का भी वर्णन किया गया है । ज्योतिष गणना क्रम से कुंभ चार प्रकार का होता है जिसमें हरिद्वार , उज्जैन, प्रयागराज और नासिक कुंभ का विस्तार से वर्णन किया गया है । असिस्टेंट प्रोफेसर डा वंदना द्विवेदी ने बताया कि
श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने प्रयाग की महिमा का अद्भुत वर्णन किया है जिसे दिखाने का पूरा प्रयास किया गया है । उन्होंने बताया कि अद्वैत वेदांत के प्रतिष्ठापक शंकराचार्य जी ने प्रयाग की महिमा का वर्णन किया है उसका भी उल्लेख किया गया है । इसमें सभी अखाड़ों के इतिहास का संक्षिप्त वर्णन करते हुए अंतिम में गंगा -यमुना -सरस्वती-नर्मदा आदि नदियों के पवित्र स्तुतियों को एक जगह गुम्फित करने का प्रयास किया गया है कि श्रद्धालु और पाठक को एक ही जगह सरलता से प्राप्त हो जाये तथा लाभान्वित हो सके।




