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दूसरों के मन में संताप उत्पन्न करने वाले कठोर और कर्कश वचनों का त्याग कर सबके हितकारी प्रिय वचन बोलना उत्तम सत्य धर्म है

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज नगर के जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व के पांचवे दिन विधि विधान के साथ उत्तम सत्य धर्म की संगीतमयी धुनों पर पूजा-अर्चना की गई।मंदिर में प्रतिदिन विश्व कल्याण की भावना से भगवान की शांतिधारा एवं अभिषेक किया जा रहा है। इस अवसर पर नगर के जैन मंदिरो में भव्य सजावट की गयी। दशलक्षण पर्व के पांचवे दिन जैन धर्म के नौवे तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। इस अवसर पर महेंद्र जैन सपरिवार ने भगवान को विशेष 9 किलो का निर्वांन लड्डू अर्पित किया एवं पुष्पदंत भगवान की शिक्षाओं पर अमल करने पर जोर दिया गया। पंडित सुनील जैन ने बताया कि दूसरों के मन में संताप उत्पन्न करने वाले कठोर और कर्कश वचनों का त्याग कर सबके हितकारी प्रिय वचन बोलना उत्तम सत्य धर्म है। अप्रिय शब्द असत्य की श्रेणी में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तम सत्य धर्म के दिन लोगो को मधुर वाणी और अच्छे वचन बोलने का संकल्प लेना चाहिये।जैन धर्म में जियो और जीने दो’ नारा देने वाले महावीर स्वामी के सिद्धांत विश्व की अशांति दूर कर शांति कायम करने में समर्थ है। भगवान महावीर ने अहिंसा की जितनी सूक्ष्म व्याख्या की है, वैसी अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने मानव को मानव के प्रति ही प्रेम और मित्रता से रहने का संदेश नहीं दिया अपितु मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति से लेकर कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी आदि के प्रति भी मित्रता और अहिंसक विचार के साथ रहने का उपदेश दिया है। शाम के समय मंदिर जी में सामूहिक आरती, पंडित सुनील जैन द्वारा शास्त्र प्रवचन एवं बूझो तो जाने प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में सभी लोगो ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिसमे विजयी प्रतियोगियो को पुरस्कार दिये गए। कल दिन बुधवार को उत्तम संयम धर्म की पूजा की जायेगी।

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