बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर मांगा समय हाईकोर्ट ने की कोरोना मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 27 मई की तारीख लगाई है। शनिवार को याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश के कुछ चुनिंदा जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने के लिए समय की मांग की गई। केंद्र सरकार की ओर से एएसजीआई एसवी राजू ने कोर्ट से यह भी कहा कि उन्हें इस बात का पता करने के लिए भी समय दिया जाय कि सरकार के पास उत्तर प्रदेश में प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटरों द्वारा डायग्नोस्टिक चार्ज की अधिकतम फीस तय करने की क्या योजना है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने एएसजीआई के इस आग्रह को स्वीकार कर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 27 मई की तारीख लगा दी।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर प्रदेश की चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने यह टिप्पणी प्रदेश में कोरोना संक्रमण को लेकर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश के चिकित्सा व्यवस्था लेकर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब मेरठ जैसे बड़े शहर व मेडिकल कॉलेज में लापरवाही है तो प्रदेश के छोटे शहरों व कस्बों की चिकित्सा व्यवस्था राम भरोसे ही है। कोर्ट ने कहा था कि अस्पताल में मरीज पूरी तरह से डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की देखभाल में रहता है और अगर डॉक्टर व तैनात पैरामेडिकल स्टाफ लापरवाही से ड्यूटी करेंगे तो यह वैसा ही कार्य है जैसे कि किसी मासूम के जीवन के साथ खिलवाड़ करना। उनका यह कार्य दुराचरण की श्रेणी में माना जाएगा। कोर्ट ने बिजनौर की चिकित्सा व्यवस्था को परखा था और वहां 31 मार्च से 12 मई तक कराए गए टेस्ट पर असंतोष जताया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार छोटे शहरों व कस्बों में चिकित्सा व्यवस्था ठीक करे। कोर्ट ने कहा था कि अधिकतर शहरों में लेवल थ्री अस्पताल की सुविधा नहीं है। शहरों में आबादी के हिसाब से व ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस महामारी से निपटने के लिए जैसी व्यवस्था की जरूरत है, अभी अपर्याप्त है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार जिसे कल्याणकारी राज्य कहा जाता है वह वैक्सीन के उत्पादन का काम क्यों नहीं कर रही है। कोर्ट ने कहा था कि प्रदेश में सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार किया जाए। एसजीपीजीआई में जैसी व्यवस्था व चिकित्सा सुविधाएं हैं, उसी प्रकार प्रयागराज, आगरा, मेरठ, कानपुर व गोरखपुर के मेडिकल कॉलेजों में भी चार सप्ताह में किया जाए।


