देश के लगभग सभी प्रमुख श्मशानों में तंत्र-मंत्र की साधना कर चुके महंत बजरंगमुनि उदासीन

प्रयागराज। महंत बजरंगमुनि उदासीन(माँ बंगलामुखी उपासक) ने बताया कि तंत्र मंत्र न ही कोई जादू है और न ही कोई चमत्कार है। तंत्र साधना तो सिर्फ परमात्मा की आराधना का मार्ग है। परमात्मा की साधना संस्कृत में की जाती है और इन संस्कृत के मंत्रों का क्रियात्मक स्वरूप ही तंत्र है। विश्व शांती और वसुधैव कुटुम्बकम के लिए तंत्र साधना की जाती है।

तंत्र साधना के लिए पहले तन को तोडऩा होगा और इंद्रियों को वश में करना होगा। तंत्र साधना समझने के लिए गहराई तक जाना होगा, तभी समझा जा सकता है। तंत्र साधना को लेकर अलग- अलग तरह की भ्रांतियां दूर करते हुए महंत बजरंगमुनि उदासीन ने कहा कि तंत्र कोई चमत्कार नहीं है। यह सिर्फ ईश्वर की उपासना का एक साधन है। ईश्वर की उपासना वैदिक, वैष्णक और तांत्रिक तरीके से ही जाती है। तंत्र साधना इसमें एक है।
तंत्र साधना का कई मर्तबा गलत प्रयोग होता है?तंत्र साधना के बारे में क्षणिक जानकर तांत्रिक ही ऐसा कर सकते हैं। तंत्र साधना में कम जानकार व्यक्ति बेहतर नहीं कर सकता है, लेकिन गलत जरूर कर सकता है। बेहतर करने के लिए तंत्र साधना की गहराई में जाना पड़ता है। तंत्र साधना का गलत उपयोग करने वाले कथित तांत्रिकों की तुलना गिद्ध की तरह की है।।


