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विलुप्त सरस्वती को खोजने आई कौशांबी वैज्ञानिकों की टीम

इलाहाबाद। प्रयागराज की धरती इलाहाबाद में विलुप्त सरस्वती नदी को खोजने विदेशी वैज्ञानिकों की टीम यहां पहुंच चुकी है।

सरस्वती नदी की यह खोज आज से प्रारंभ होगी। विदेशी वैज्ञानिकों की यह टीम करीब दो हफ़्तों में इलाहाबाद में सरस्वती नदी की खोज करेगी। सरस्वती नदी को खोजने के लिए हाई टेक्नोलॉजी उपकरणों का उपयोग होगा।

हेलीकॉप्टर से गंगा नदी का एक्स-रे नुमा मैप लिया जाएगा। इसके लिए कौशाम्बी के पिपरी थाना क्षेत्र के कादिलपुर में इसकी शुरुवात की गई है। ये मशीन कौशाम्बी और इलाहाबाद में पानी की गहराई को भी मापेगी और विलुप्त हो चुकी नदियों की भी पहचान कर पायेगी। ये जांच यूपी में पहली बार की जा रही हैं।

गंगा यमुना सरस्वती बहतीं थीं कभी

इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम माना जाता है। इसमें सरस्वती विलुप्त हैं। सरस्वती नदी के अस्तित्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरस्वती नदी के इसी अस्तित्व का पता लगाने के लिए केंद्रीय भू जल बोर्ड, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद नदी विकास एंव गंगा मंत्रालय की इलाहाबाद और लखनऊ की टीम के साथ डेनमार्क, कनाडा, स्काॅटलैंड सहित अन्य देश के वैज्ञानिकों की टीम सरस्वती नदी को खोजने का काम करेगी।

हाई टेक्नोलॉजी से खोज

यहां आए वैज्ञानिक हाई टेक्नोलाॅजी के माध्यम से इलाहाबाद में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक सर्वे करेंगे। जल संसाधन मंत्रालय,भारत सरकार की ओर से कराए जा रहे इस सर्वे का कार्य कल से प्रारंभ हो जाएगा। सर्वे के इस कार्य में हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा।

हेलीकाप्टर के नीचे लगा डिवाइस ऐसे तैयार करेगा मैप

यहां एनजीआरआई के प्रिसिपल वैज्ञानिक डॉ0 सुभाष चंद्रा और उनकी टीम और केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक वाईबी कौशिक,डॉ0 शशिकांत सिंह, इलाबाबाद क्षेत्र प्रभारी डॉ0 एमएन खान व भोपाल से आए डॉ0 राकेश सिंह सहित अन्य व वैज्ञानिकों की टीम यहां आई हुई है।

सरस्वती नदी के साथ नेशनल एक्यूफर मैपिंग के तहत सरस्वती नदी या विलुप्त जल श्रोत पता लगाने के लिए देश के साथ-साथ विदेशी वैज्ञानिकों की टीम भी होगी। सर्वे में विदेशी उपकरणों का भी उपयोग होगा। नदी का सर्वे हेलीकॉप्टर से किया जाएगा। हेलीकॉप्टर के नीचे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक सिस्टम डिवाइस या टीईएम लगाया जाएगा। यह गंगा नदी के जल से 30 मीटर ऊपर लटका होगा। यह गंगा सतह से 300 मीटर तक का एक्स-रे नुमा मैप रिपोर्ट तैयार करेगा। यह हाई रेजोल्यूशन डाटा उपलब्ध कराएगा।

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि यहां सरस्वती नदी या कोई अन्य जल श्रोत था कि नहीं। जमीन के अंदर भूजल का कोई श्रोत है या भूजल श्रोत का कोई पुराना चैनल हो या नदी जैसा कुछ भी होगा तो पता चल जाएगा। जल धारा मिलने की कोई उम्मीद है या यहां विलुप्त जलधारा कहां मिल सकती है। पता चल जाएगा।

इसके अलावा अन्य अध्ययन का आयाम होगा। जैसे कहाँ जल स्तर नीचे जा रहा है, कहां जल स्तर बढ़ा है, सर्वाधिक प्रदूषण वाला क्षेत्र, पानी का गुणवत्ता का भी पता लगाया सकेगा।  अब गावँ वाले भी इस तरह की जांच के तरीके को सराह रहे है और इसकी शुरुवात कौशाम्बी जैसे जिले से करने पर खुश है।

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