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अब इन दो ब्लाक प्रमुखों की खतरें में पड़ी कुर्सी, जानिये क्यों

जौनपुर। पहले खुटहन, फिर सिकरारा और बक्शा ब्लाक प्रमुख की कुर्सी जाने के बाद सबकी निगाहें बदलापुर व करंजाकला प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रकिया पर टिक गई हैं। पक्ष और विपक्ष के लोग जोड़-तोड़ में लग गए हैं। वहीं डोभी ब्लाक प्रमुख के खिलाफ मतदान हो चुका है लेकिन कोर्ट के आदेश के कारण उस पर फैसला नहीं हो सका।

जिले में एक के बाद एक तीन ब्लाक प्रमुखों की कुर्सी चली गई। असंतुष्ट बीडीसी सदस्यों ने एक जुट होकर सभी का तख्ता पलट दिया। सबसे पहले हंगामाखेज शुरूआत बीते 6 नवंबर को खुटहन प्रमुख की कुर्सी से हुई। इसके बाद 4 जनवरी को सिकरारा और 5 फरवरी को बक्शा में भी वही देखने को मिला।

एक के बाद एक प्रमुखों के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव से राजीतिक गहमा-गहमी भी मची रही। सभी कुर्सी गिराने और बचाने के लिए जुगत लगाते रहे। बहुचर्चित खुटहन प्रमुख सरयूदेई की कुर्सी जाने के बाद इस बात के भी संकेत आ चुके हैं कि प्रशासन हर तरह से कमर कसे हुए है। वहां हुए उपद्रव के बाद 4 जनवरी को सिकरारा ब्लाक मुख्यालय के सभागार भवन में कड़ी सुरक्षा के बीच ब्लाक प्रमुख विजय यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया।

5 फरवरी को बक्शा ब्लाक प्रमुख रंजीत यादव के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। विपक्षी सजल ¨सह ने बीडीसी सदस्यों के साथ मिल कर तख्ता पलट कर दिया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुल 101 सदस्यों में से 57 सदस्य सदन में पहुंचे। इसी बीच डोभी ब्लाक प्रमुख शिवशंकर यादव के खिलाफ भी बीडीसी सदस्य विद्या यादव के नेतृत्व में अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी शुरू हुई। 12 फरवरी को इस सीट के लिए भी मतदान कर दिया गया लेकिन कोर्ट के स्थगन आदेश से अभी वहां कोई फैसला नहीं आ सका। 15 फरवरी को करंजकला ब्लाक प्रमुख के खिलाफ असंतुष्ट सदस्यों ने डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी से भेंट की।

साफ कर दिया कि प्रमुख दीपचंद्र सोनकर पर उनका विश्वास नहीं रह गया। बैठक में चर्चा करा ली जाए। शुक्रवार को बदलापुर ब्लाक के गौरा से निर्वाचित बीडीसी सदस्य सुमन के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे बीडीसी सदस्यों ने भी डीएम से भेंट कर प्रमुख प्रभावती कनौजिया के खिलाफ अविश्वास जाहिर किया।

अनियमितता का आरोप लगाते हुए 69 सदस्यों का हस्ताक्षरयुक्त पत्रक सौंपा। थोड़े-थोड़े अंतराल पर प्रस्तुत किए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव से सत्ताधारी प्रमुखों में भी बेचैनी है। अधिकतर तो बीडीसी सदस्यों को संतुष्ट व दूसरे तरीकों से अपनी जड़ मजबूत करने में लग गए हैं।

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