चयन बोर्ड में लगे आरोपों से बरी हुए पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.पी. वर्मा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज के पूर्व अध्यक्ष ,वरिष्ठ शिक्षाविद और राजकीय महाविद्यालय गोसाई खेडा, उन्नाव के एसोसिएट प्रोफेसर और हिन्दी के विभागाध्यक्ष डा आर पी वर्मा चयन बोर्ड में लगे आरोपों से बरी हो गये है।

डा वर्मा ने बताया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले का मुकदमा विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय इलाहाबाद में चला था। न्यायालय ने अप्रैल – 2019 में उन्हें बरी कर दिया है। डा.वर्मा ने बताया कि परिवादी पक्ष (चयन बोर्ड प्रशासन) उनके खिलाफ कोई साक्ष्य या मजबूत गवाह कोर्ट में पेश नही कर सका।

उल्लेखनीय है कि डा आर पी वर्मा का चयन इस वर्ष शिक्षक दिवस पर सरस्वती पुरस्कार के लिए हुआ था लेकिन उनके खिलाफ पहले लगे आरोप संज्ञान में आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने उनका नाम सूची से हटा दिया था। उधर, चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डा आरपी वर्मा ने कहा कि उन पर जो भी आरोप लगाये गये है वह पूरी तरह से फर्जी है क्योकि कोर्ट ने उन आरोपो को निराधार मानते हुए अप्रैल-2019 में खत्म कर दिया है।

कहा कि कुछ लोग ऐसे है जो कि मेरी प्रतिष्ठा और बढती हुई लोकप्रियता से ईष्या रखते है। वह साजिश करके मुझे बदनाम करना चाहते है। कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में मेरे उल्लेखनीय कार्यो को देखते हुए शिक्षक दिवस पर मुझे सरस्वती सम्मान देने का निर्णय लिया था लेकिन कुछ लोग साजिश करके बदनाम करने में लगे हुए है। डा वर्मा ने चयन बोर्ड का अध्यक्ष रहते हुए 2011-12 के दौरान कई उल्लेखनीय कार्य किया था जिसमें आनलाइन आवेदन लेने, आनलाइन संशोधन, हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क, चयन बोर्ड की नयी बिल्डिंग और टीजीटी,पीजीटी और प्रधानाचार्यो के रिक्त 2011 और 2013 का विज्ञापन जारी करके भर्ती प्रक्रिया शुरु करवा दिया था ।

कहा कि चयन बोर्ड में जितना काम वह अपने एक वर्ष अध्यक्ष रहते हुए किया है उतना कार्य आज तक नही हुआ है। उल्लेखनीय है कि अम्बेडकर नगर निवासी चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षाविद राजकीय डिग्री कालेज गोसाईं खेडा उन्नाव के हिन्दी के विभागाध्यक्ष डा आरपी वर्मा है।

उन्होंने 44 वर्ष की उम्र में विभिन्न विषयों पर 80 से अधिक पुस्तकें लिखी है जबकि 150 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके है। देश और विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की ओर से 100 से अधिक बार सम्मानित / पुरस्कृत किये जा चुके है। बुन्देलखण्ड विवि में डा वर्मा पर शोध चल रहा है। उनका कहना है कि साहित्य से समाज की सेवा करता रहूंगा। किसी के कीचड उछालने से मेरे ऊपर कोई फर्क नही पडने वाला है।





